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राम-जानकी मंदिर से शिवालय तक कृष्णमय हुआ माहौल, आधी रात जन्मे नंदलाल

 नंद के घर आनंद भयो... जय कन्हैया लाल की के जयघोष से गूंजे मंदिर परिसर, श्रद्धालुओं ने मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव


शिव मन्दिर में जन्मे कान्हा, भक्तो ने किया जयघोष 


DEVA TV / Prayagraj

नैनी, प्रयागराज। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पावन बेला पर संगम नगरी में आस्था और भक्ति का अद्भुत रंग देखने को मिला। नैनी जंक्शन के सामने स्थित श्री राम-जानकी मंदिर और यमुनानगर गली के सामने स्थित शिव मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा, उल्लास और धार्मिक भावनाओं के साथ मनाया गया। मंदिर परिसर भजन-कीर्तन और “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठा।

मध्यरात्रि में जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का शुभ क्षण आया, मंदिरों में घंटा-घड़ियाल और शंखनाद से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।


श्री राम-जानकी मंदिर में कान्हा के जन्म की धूम

श्री राम-जानकी मंदिर सेवा ट्रस्ट के कर्ताधर्ता त्रिभुवन चौरसिया ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि धर्म, सत्य, प्रेम और कर्म का संदेश देने वाला पर्व है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से समाज को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, सत्य का साथ देने और अपने कर्तव्य का पालन करने की प्रेरणा दी। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों और उनके जीवन संदेश से जोड़ना है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के नाम का स्मरण करने मात्र से मन को शांति और भक्ति की अनुभूति होती है। मंदिर में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को प्रेम, सद्भाव और सनातन संस्कृति का संदेश मिले, यही ट्रस्ट का प्रयास है।



शिव मंदिर में भी गूंजा ‘जय श्रीकृष्ण’

वहीं शिव मंदिर के संरक्षक योगेश चौरसिया ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में अद्भुत शक्ति है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव हमें यह संदेश देता है कि जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब धर्म की स्थापना के लिए ईश्वर किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन प्रेम, नीति, त्याग और कर्मयोग का प्रतीक है। भगवान ने गीता के माध्यम से मानव समाज को कर्म का जो संदेश दिया, वह आज भी उतना ही प्रासंगिक है।

योगेश चौरसिया ने कहा कि शिव और कृष्ण की आराधना में भी भक्तों को एक ही सनातन आध्यात्मिक भाव दिखाई देता है—ईश्वर के प्रति समर्पण और मानवता के प्रति प्रेम।


श्री राम जानकी मंदिर में जन्मे कान्हा को निहारते भक्तगण


बाल गोपाल के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु

जन्मोत्सव के दौरान मंदिरों में विशेष सजावट की गई। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को आकर्षक ढंग से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने माखन-मिश्री, फल, पंचामृत और अन्य प्रसाद अर्पित कर भगवान की पूजा-अर्चना की।

महिलाओं और बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कई श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में झूमते नजर आए। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का दौर चलता रहा।




आधी रात को हुआ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का शुभ समय आते ही मंदिर परिसर में शंखनाद, घंटियों और जयकारों से वातावरण गूंज उठा।

“नंद के घर आनंद भयो...”

“जय कन्हैया लाल की...”

“राधे-राधे...”

के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप का दर्शन किया। इसके बाद आरती और प्रसाद वितरण हुआ। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की शुभकामनाएं दीं।




आस्था के साथ सामाजिक संदेश भी

मंदिर में आयोजित जन्मोत्सव ने जहां श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और भक्ति से जोड़ा, वहीं आयोजकों ने प्रेम, भाईचारा, सद्भाव और सनातन संस्कृति को मजबूत करने का संदेश भी दिया।

भगवान श्रीकृष्ण का संदेश यही है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य को सत्य, धर्म और अपने कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।




श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का संदेश

“मन में कृष्ण हों तो जीवन में धर्म का प्रकाश रहता है,

हृदय में भक्ति हो तो हर कठिन राह आसान लगती है।”

श्री राम-जानकी मंदिर और शिव मंदिर में मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव इसी आस्था, विश्वास और भक्ति का सुंदर प्रतीक बन गया।

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