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अरैल में रफ्तार का कहर, गड्ढे में डाली गिट्टी बनी मौत का सबब!

बेकाबू कार ने बाइक सवारों और गुमटियों को रौंदा, कई के हताहत होने की आशंका; आधा दर्जन से अधिक घायल बताए गए


DEVA TV / राजेश सरकार (वरिष्ठ पत्रकार)

प्रयागराज। पौराणिक अरैल क्षेत्र में रविवार रात तेज रफ्तार और बदहाल सड़क ने ऐसा खौफनाक मंजर पैदा कर दिया कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। पुराने पुल की ओर से डीपीएस की तरफ जा रही अधिवक्ता का स्टीकर लगी एक तेज रफ्तार कार बेणी माधव मंदिर के पास सड़क पर पड़े गहरे गड्ढे में डाली गई गिट्टी पर अचानक अनियंत्रित हो गई। इसके बाद कार ने सामने मौजूद बाइक सवारों, खड़ी बाइकों और गुमटियों को अपनी चपेट में ले लिया और पेड़ से जा टकराई।

हादसा इतना भीषण था कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसके एयरबैग खुल गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। तीन से अधिक लोगों की मौत की चर्चा है, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। हालांकि देर रात तक पुलिस-प्रशासन की ओर से मृतकों और घायलों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।


🚗 गहरे गड्ढे में डाली गिट्टी पर फिसली कार

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रविवार रात करीब 9 बजे कार तटबंध मार्ग से तेज गति से गुजर रही थी। बेणी माधव मंदिर के पास सड़क पर बने गहरे गड्ढे में डाली गई गिट्टी पर पहुंचते ही कार का संतुलन बिगड़ गया।

कार चालक नियंत्रण खो बैठा और वाहन सामने मौजूद बाइक सवारों एवं सड़क किनारे लगी गुमटियों को रौंदता हुआ पेड़ से जा भिड़ा। टक्कर के बाद कार यू-टर्न लेकर रुक गई।


⚠️ दो की मौत की चर्चा, कई गंभीर

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव का प्रयास शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार में चालक समेत कई लोग सवार थे। चालक की हालत अपेक्षाकृत ठीक बताई गई, जबकि कार में बैठे कुछ लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई।

दो लोगों के मौके पर ही दम तोड़ने की चर्चा भी रही। वहीं कार की चपेट में आए बाइक सवारों में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात कही गई। पुलिस के पहुंचने से पहले स्थानीय लोगों ने घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाना शुरू कर दिया।


🚨 निषाद परिवार के युवकों के हताहत होने की सूचना

अरैल के बेणी माधव मंदिर के पुजारी दामोदर दास के हवाले से स्थानीय स्तर पर अरैल के निषाद परिवार के कुछ युवकों के भी हादसे में हताहत होने की सूचना सामने आई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक गोलू निषाद के नाबालिग बेटे नन्नी और आरो तथा गुड्डू निषाद के 15 वर्षीय बेटे कृष्णा निषाद के संबंध में भी मौत की सूचना की चर्चा है।

हालांकि इन मौतों की पुलिस स्तर से देर रात तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी। इसलिए मृतकों की अंतिम संख्या पोस्टमार्टम एवं पुलिस सत्यापन के बाद ही स्पष्ट होगी।




💥 हवा में उड़ी गुमटी, बाइकों के उड़े परखच्चे

हादसे की भयावहता का अंदाजा घटनास्थल से लगाया जा सकता है। सेल्फी प्वाइंट के पास सड़क किनारे लगी चाय-पान की गुमटी कार की टक्कर के बाद हवा में उछल गई और रेलिंग तोड़कर लटक गई।

कई बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। सड़क पर वाहनों के टूटे पुर्जे और मलबा बिखर गया। हादसे के बाद देखते ही देखते घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुट गई। सूचना मिलते ही अरैल चौकी प्रभारी और नैनी पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची और स्थिति को संभालने में जुट गई।


🕳️ दस दिन पहले ही सामने आया था जानलेवा गड्ढा

इस हादसे ने सड़क की बदहाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार बेणी माधव मंदिर के पास करीब दस दिन पहले सड़क पर बेहद गहरा गड्ढा हो गया था। लोगों ने इसकी तुलना इतनी गहराई से की थी कि इसमें हाथी तक समा जाए।

स्थानीय लोगों और मीडिया की ओर से इस खतरनाक गड्ढे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद प्रशासन ने उसे भरने के लिए गिट्टी डलवाना शुरू कराया था। बताया जा रहा है कि मौके पर करीब पांच ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से गिट्टी डाली गई थी।

लेकिन सवाल यह है कि क्या गड्ढे को पूरी तरह समतल और सुरक्षित किए बिना ही सड़क को यातायात के लिए छोड़ दिया गया? रविवार रात हुए हादसे ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है।


🍾 क्या कार सवार नशे में थे?

हादसे के बाद कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने कार में सवार लोगों के नशे में होने का दावा किया है। कार से शराब की बोतलें मिलने की बात भी कही जा रही है। कार की विंडस्क्रीन पर अधिवक्ता का स्टीकर लगा होने की बात भी सामने आई है।

हालांकि कार सवार नशे में थे या नहीं और वाहन में शराब की बोतलें थीं या नहीं—इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस जांच और मेडिकल परीक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


👮 पुलिस जांच में जुटी

हादसे के बाद नैनी पुलिस ने घटनास्थल का जायजा लिया। पुलिस हादसे की वास्तविक वजह, वाहन की गति, चालक की स्थिति, मृतकों की संख्या और घायलों की स्थिति की जानकारी जुटा रही है। 

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल

जिस गड्ढे की खतरनाक स्थिति करीब दस दिन पहले ही सामने आ चुकी थी, उसे पूरी तरह सुरक्षित क्यों नहीं किया गया?

क्या सड़क पर गिट्टी डालकर छोड़ देना पर्याप्त था?

क्या वहां रात के समय वाहनों को सावधान करने के लिए बैरिकेड, रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत लगाए गए थे?

और अगर हादसे में लोगों की जान गई है तो जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

अरैल के इस दर्दनाक हादसे ने इन सवालों को सामने ला दिया है।


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