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जब गंगा मैया पहुंचीं बड़े हनुमान जी की शरण में... संगम में बढ़ा जल, आस्था का अद्भुत दृश्य देख भावुक हुए श्रद्धालु

 गंगा-यमुना की बढ़ती धाराओं के बीच संगम क्षेत्र का बदला स्वरूप, बड़े हनुमान मंदिर के करीब पहुंचा पावन जल



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प्रयागराज। तीर्थराज प्रयाग में इन दिनों प्रकृति और आस्था का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिल रहा है। गंगा और यमुना की बढ़ती धाराओं के बीच संगम क्षेत्र का स्वरूप बदल गया है। पवित्र जल अब संकटमोचन बड़े हनुमान मंदिर के करीब तक पहुंच गया है।

संगम की ओर बढ़ती लहरें और मंदिर की ओर आती गंगा की धारा का यह दृश्य श्रद्धालुओं को भावुक कर रहा है। मानो मां गंगा स्वयं अपने पुत्र हनुमान जी के चरणों का स्पर्श करने चली आई हों।

संगम में दिख रहा आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम

जहां सामान्य दिनों में संगम क्षेत्र श्रद्धालुओं की आस्था, मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि से गूंजता है, वहीं अब चारों ओर गंगा-यमुना का विस्तृत जल दिखाई दे रहा है। बढ़ते जलस्तर ने संगम क्षेत्र के कई हिस्सों को अपने आगोश में ले लिया है। बड़े हनुमान मंदिर के करीब पहुंचता पानी प्रयागराज के लोगों के लिए कौतूहल और चिंता—दोनों का विषय बना हुआ है। लेकिन इस दृश्य में एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभूति भी दिखाई देती है।

🚩 धरती पर लेटे हनुमान जी और ऊपर बढ़ती गंगा

प्रयागराज का बड़ा हनुमान मंदिर अपनी अनूठी मान्यता के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहां भगवान हनुमान की विशाल प्रतिमा भूमि के नीचे लेटी हुई अवस्था में विराजमान है।

मान्यता है कि जब गंगा का जल बढ़ता है और मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचता है, तब श्रद्धालु इसे मां गंगा द्वारा बजरंगबली के चरणों का अभिषेक मानकर श्रद्धा से देखते हैं। यह धार्मिक आस्था है, जिसका वैज्ञानिक प्रमाण होने का दावा नहीं किया जा सकता। लेकिन करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए इस दृश्य का भावनात्मक और आध्यात्मिक महत्व बेहद गहरा है।

🙏 गंगा मैया और बजरंगबली का अद्भुत मिलन

संगम की ओर से आती गंगा की धारा जब बड़े हनुमान मंदिर की ओर बढ़ती दिखाई देती है तो श्रद्धालुओं की जुबान पर सहज ही निकल पड़ता है—

"जय श्री राम..." "जय बजरंगबली..." और "हर हर गंगे..."

प्रयागराज की यही तो विशेषता है

यहां नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था है। यहां गंगा को मां कहा जाता है और हनुमान जी को संकटमोचन। ऐसे में दोनों से जुड़ा यह दृश्य श्रद्धालुओं के मन में एक अलग ही आध्यात्मिक भाव पैदा करता है।

🕉️ तीर्थराज प्रयाग में प्रकृति भी लिखती है आस्था की कहानी

प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का संगम सदियों से आध्यात्मिक चेतना का केंद्र रहा है। कुंभ और महाकुंभ में करोड़ों श्रद्धालु यहां आकर संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं। और जब बरसात के मौसम में नदियां अपने उफान पर आती हैं तो संगम का स्वरूप ही बदल जाता है। इस समय भी गंगा-यमुना की बढ़ती धाराओं के बीच संगम क्षेत्र का दृश्य देखते ही बन रहा है।

📸 तस्वीरें कह रही हैं—संगम बदल रहा है

संगम क्षेत्र से सामने आई तस्वीरों में चारों ओर पानी का विस्तार दिखाई दे रहा है। बड़े हनुमान मंदिर के आसपास भी जलस्तर बढ़ता नजर आ रहा है। यह दृश्य जहां श्रद्धालुओं के लिए आस्था से जुड़ा है, वहीं बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सावधानी भी बेहद जरूरी है। श्रद्धालुओं से अपील है कि वे प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों में ही रहें और तेज बहाव वाले पानी के करीब जाने से बचें।

🚩 संकटमोचन की नगरी में आस्था अडिग

जल बढ़ रहा है...

घाट डूब रहे हैं...

संगम का स्वरूप बदल रहा है...

लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था आज भी अडिग है।

क्योंकि यह केवल प्रयागराज नहीं...

यह तीर्थराज प्रयाग है।

जहां गंगा मां हैं...

जहां यमुना मां हैं...

जहां संगम मोक्ष की कामना का केंद्र है...

और जहां बड़े हनुमान जी संकटमोचन बनकर भक्तों की आस्था के प्रहरी के रूप में विराजमान हैं।

गंगा की लहरें बढ़ती रहें या घटती रहें,

प्रयाग की आस्था कभी नहीं घटती।


🚩 जय श्री राम। 🔱 हर हर महादेव। 🌊 हर हर गंगे। 🙏 जय बजरंगबली।


Deva TV Ground Report | संगम, प्रयागराज

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